अमरोहा में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट: पांच की मौत, एक दर्जन घायल

अमरोहा, 16 जून 2025 – उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के अतरसी गांव में सोमवार सुबह एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पांच महिला मजदूरों की जान ले ली और कम से कम 12 अन्य को घायल कर दिया। यह विस्फोट दोपहर करीब 12 बजे राजबपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक लाइसेंस प्राप्त फैक्ट्री में हुआ, जिसने इमारत को मलबे में बदल दिया और आसपास के गांवों में दहशत फैला दी। अधिकारियों ने इस दुखद घटना के कारणों की जांच के लिए एक बहु-एजेंसी जांच शुरू की है, जिसने भारत के पटाखा उद्योग में सुरक्षा मानकों को लेकर फिर से सवाल उठाए हैं।
अतरसी गांव में भीषण विस्फोट
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसने फैक्ट्री की इमारत और टिन के शेड को पूरी तरह नष्ट कर दिया, जिससे मलबा 300 मीटर दूर तक बिखर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट की आवाज आसपास के गांवों में सुनाई दी, जिससे अफरातफरी मच गई और स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े। यह फैक्ट्री, जो कथित तौर पर हापुड़ के व्यवसायी सैफ उर रहमान की थी, लाइसेंस प्राप्त थी, लेकिन परस्पर विरोधी रिपोर्टों ने इसके सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।
अमरोहा के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “लगभग 12 बजे थाना राजबपुर, गांव अतरसी में एक लाइसेंस प्राप्त पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट की सूचना मिली। पुलिस और एम्बुलेंस तुरंत मौके पर पहुंची।” अमरोहा पुलिस ने X पर एक पोस्ट में बताया कि नौ घायल महिलाओं को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि चार मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए हैं। हालांकि, कुछ सूत्रों का कहना है कि मृतकों की संख्या छह तक हो सकती है, क्योंकि मलबे में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए बचाव कार्य जारी है।
बचाव और राहत कार्य जारी
स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया, ताकि ढह चुकी इमारत से बचे हुए लोगों को निकाला जा सके। घायलों, जिनमें से कई की हालत गंभीर है, को अमरोहा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जबकि दो मजदूरों को बेहतर इलाज के लिए मेरठ स्थानांतरित किया गया। जिला मजिस्ट्रेट निधि गुप्ता वत्स ने एक जांच समिति गठित करने की घोषणा की है, जो विस्फोट के कारणों की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है।
“स्थिति वर्तमान में नियंत्रण में है। हमने इस घटना की गहन जांच के लिए एक समिति गठित की है,” वत्स ने पत्रकारों को बताया। राहत कार्य जारी हैं, और अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को सहायता का वादा किया है।
पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा चिंताएं
इस त्रासदी ने भारत के पटाखा उद्योग में सुरक्षा प्रथाओं पर फिर से सवाल उठाए हैं, जहां घातक दुर्घटनाओं का इतिहास रहा है। विस्फोटक अधिनियम, 1884 और विस्फोटक नियम, 2008 के तहत उचित वेंटिलेशन, अग्नि सुरक्षा उपकरण और खतरनाक सामग्रियों को संभालने के लिए प्रशिक्षण जैसे सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य हैं। हालांकि, विशेष रूप से छोटी इकाइयों में इनका पालन अक्सर कमजोर होता है। अप्रैल 2025 में गुजरात के बनासकांठा जिले में एक अवैध पटाखा गोदाम में हुए विस्फोट में 21 लोगों की मौत हो गई थी, जो व्यवस्थागत खामियों को दर्शाता है।
X पर पोस्ट्स में जनता का गुस्सा और दुख झलक रहा था, जिसमें उपयोगकर्ताओं ने इस विस्फोट को “हृदयविदारक त्रासदी” बताया और सख्त नियमों की मांग की। एक पोस्ट में कहा गया, “अमरोहा की पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट दिखाता है कि हमने पिछली दुर्घटनाओं से कितना कम सीखा है। मजदूरों की सुरक्षा कब प्राथमिकता बनेगी?”
आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच
अमरोहा प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। पीड़ितों के परिवारों के लिए जल्द ही मुआवजे की घोषणा होने की उम्मीद है, जैसा कि गुजरात विस्फोट में प्रत्येक परिवार को ₹4 लाख देने के उदाहरण में देखा गया था। जांच समिति संभावित कारणों की जांच करेगी, जिसमें विस्फोटकों का गलत संचालन, उपकरण की विफलता या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन शामिल है।
फैक्ट्री के लाइसेंस की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई है, कुछ रिपोर्ट्स में सुझाव दिया गया है कि यह अवैध रूप से संचालित हो रही थी या अत्यधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री का भंडारण कर रही थी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या फैक्ट्री ने अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट और भंडारण सीमाओं का पालन किया था।
सुधार की पुकार
अमरोहा विस्फोट भारत के पटाखा उद्योग में सुरक्षा नियमों के सख्त प्रवर्तन की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। त्योहारी सीजन नजदीक होने के साथ, पटाखों की मांग में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे निर्माताओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। विशेषज्ञ सरकार से नियमित निरीक्षण, मजदूरों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण और गैर-अनुपालन के लिए कठोर दंड लागू करने का आग्रह करते हैं ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।
फिलहाल, ध्यान प्रभावित परिवारों का समर्थन करने और घायलों को उचित देखभाल सुनिश्चित करने पर है। यह घटना ढीले सुरक्षा मानकों की मानवीय लागत की एक गंभीर याद दिलाती है, जिसने राष्ट्र को एक और रोकी जा सकने वाली क्षति के लिए शोक में डुबो दिया है।
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स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, न्यूज़18, सियासत.कॉम, डेक्कन क्रॉनिकल, एएनआई, और X पर पोस्ट्स।
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